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4 Comments

  1. विक्की
    April 15, 2020 @ 6:29 pm

    ईश्वरीय न्याय .. वाकई ईश्वरीय न्याय था। प्रेमचंद जी की कहानिया वाकई आत्मा में पड़े बोझ को हटाती है हमेशा। छल कपट और अपराधबोध का हमेशा द्वंद्व दिखाता और अंत हमेशा सुखद होता … बहुत बढ़िया कहानियॉ में से एक

    • साहित्य विमर्श
      April 16, 2020 @ 10:12 pm

      जी. सही विश्लेषण.

  2. हितेष रोहिल्ला
    April 16, 2020 @ 5:39 pm

    बहुत बढ़िया

    • साहित्य विमर्श
      May 21, 2020 @ 1:23 pm

      धन्यवाद

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