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जॉर्डन की यात्रा के दौरान शारजाह हवाई अड्डे में 7-8 अरब शेखों को बड़े-बड़े बाज पक्षियों के साथ देखा, मेरे अतिरिक्त अन्य लोगों के लिए भी यह कौतूहल का विषय था, पर यहाँ के शेखों के लिए बेहद सामान्य चीज थी। उनके चेहरे में वैभव की झलक थी। बाज का मालिक होना उनके लिए एक गर्व व प्रतिष्ठा का विषय था। दरअसल मरूस्थलीय देशों में यह खानाबदोश व घुमन्तू जाति ’’विडविन संस्कृति का प्रतीक है।

यह पक्षी पारम्परिक रूप से शिकार के लिए इस्तेमाल किया जाता था और रेगिस्तान में जीवित रहने का एक स्त्रोत था। अरब के घोड़े या ऊँट के समान बाज पक्षी उनकी संस्कृति का एक अंग है। बाज शक्ति, साहस, चपलता के कारण यूएई का राष्ट्रीय प्रतीक है। यूएई में कानूनन बाज के साथ बिजनेस क्लास में हवाई यात्रा की जा सकती है। अधिकांश के लिए यह कल्पनातीत ही है।

अम्मान के क्वीन आलिया अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर प्ले कार्ड लिए गाइड भारतीय दल का इंतजार कर रहा था। भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए जॉर्डन में ’’वीजा ऑन अराइवल’’ की सुविधा है। हवाई अड्डे से दल के यात्री होटल के लिए रवाना हुए जबकि हम चार यात्रियों के लिए मशहूर पर्यटन स्थल पेट्रा के लिए अलग व्यवस्था की गई थी। पिछली यात्राओं में इस स्थल के दर्शन न हो पाए थे। जॉर्डन के हाइवे डेजर्ट जिसकी लम्बाई 300 किलोमीटर है, कार की 150 किलोमीटर की रफ्तार से भयभीत मैं दुबका ही रहा। कार चालक बीच-बीच में पूछता कि आप लोगों को डर तो नहीं लग रहा, पर झेंपते हुए मैं कहता – ’’नहीं, बिल्कुल नहीं। कभी-कभी लगता, कहीं यह मेरी विश्वयात्रा का अंतिम पड़ाव तो नहीं।

इन क्षेत्रों में प्रकृति की मार और अन्यायपूर्ण दास्तान का कोई अंत नहीं। पूरी मिट्टी जली हुई, घास फूस तक नहीं, बस यहाँ-वहाँ विरल आबादी दिख जाती है। ऐसे इलाकों में इस्लामिक स्टेट के कारण काफी सारे इराकी, लेबनानी व सीरियाई शरणार्थी बस गए हैं। शरणार्थी बनकर जीना सबसे बड़ी त्रासदी है – उन्हें सुरक्षा भले ही मिल गई हो पर वे शांति व एक बेहतर भविष्य की उम्मीद नहीं कर सकते।

पेट्रा ‘होर’ नामक पहाड़ की ढलान पर बना हुआ है और गुलाबी रंग की पहाड़ी से घिरी हुई है। दो पहाड़ों के बीच चलना रोमांचक अनुभव है। इसकी लम्बाई लगभग 3 किलोमीटर है, अतः पर्यटक तांगों और घुड़सवारी का भी आनंद लेते हैं। पत्थरों में पेट्रा के विस्मयकारी स्मारक पत्थर के चट्टानों और पहाड़ों में कटे हुए हैं जो सूर्योदय और सूर्यास्त के समय ये रंग-बिरंगी दिखाई पड़ते हैं। और अंत में गाइड ने हमारे साथ की महिलाओं से यह कहकर हाथ मिलाने से इनकार कर दिया  कि वो एक मुस्लिम है।

अंधेरा हो आया था। कार चालक ने अपना मोबाइल नंबर देते हुए हमें पूर्व में ही पेट्रा भ्रमण पूर्ण होने के बाद किसी भी जोर्डनवासी से उन्हें बुला लेने को कह गया था। उन्होंने कहा था कि जोर्डनवासी अत्यंत मित्रवत व्यवहार करते हैं, अतः टिकट काउंटर  के आसपास स्थित छोटे बाजार में किसी भी दुकानदारों से बिना संकोच के सहायता ले लीजिएगा। उनकी बातें सत्य थीं। इतने विशाल क्षेत्र में मरूस्थल होने के कारण कृषि के बारे में सोचना बेमानी है , पर जगह-जगह बिजली की जगमगाहट लोगों को आकर्षित करतीं हैं।

दूसरे दिवस बस में गाइड ने कहा कि प्राचीन में अम्मान फिलाडेलफिया कहलाता था, जिससे मेरी रूचि इस देश की सांस्कृतिक संरचना को लेकर और बढ़ गई। यूनानी (ग्रीक) और रोमन काल में इसे फिलाडेलफिया अवश्य कहा जाता था, किन्तु इस्लामी शासन में अम्मान के नाम से जाना जाने लगा। पर ईसाइयों के धर्मग्रन्थ बाईबिल के प्रकाशन ग्रंथ में उल्लिखित फिलाडेलफिया से इसका सम्बन्ध नहीं है, वरन पूर्व में एशिया माईनर वर्तमान में आधुनिक टर्की में अलसेहर नगर को इस नाम से जाना जाता था।

बाईबिल में जॉर्डन का उल्लेख बारम्बार मिलता है। ओल्ड टेस्टामेंट में 180 बार तथा न्यू टेस्टामेंट में लगभग 15 बार और इसीलिए ईसाइयों के लिए जॉर्डन खास है। इस इस्लामी देश में मेरे अध्ययन का केन्द्र बिन्दु बाईबिल में वर्णित घटनाओं और स्थानों से परिचित भी होना था।

जॉर्डन में दुनिया के कुछ सबसे पुराने ईसाई समुदाय शामिल हैं। वर्तमान में वे कुल आबादी का 4 प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं। अन्य अरब देशों की तुलना में यहाँ ईसाई आश्चर्यजनक रूप से जॉर्डन के समाज से घुले मिले हैं और उच्च स्तर पर स्वतंत्रता का आनंद लेते हैं। सभी ईसाई धार्मिक समारोह सार्वजनिक रूप से जॉर्डन में मनाये जाते हैं। पूरे इस्लामिक देशों में जॉर्डन ही उदारपंथी देश है। यहाँ की सरकार ने ईसाई धर्म से जुड़े स्मारकों के जीर्णोद्धार में भी रुचि दिखाई है। यह देश ’’पवित्र भूमि’’ का हिस्सा है, अतः तीर्थयात्रा व पर्यटन गतिविधियों को आकर्षित करते हैं। माऊंट नीबो, मडाबा, मचेरस, अल-मगथस यानी ईसा के बप्तिज्म साईट आदि मुख्य रूप से ईसाइयों के धार्मिक स्थल हैं। मचेरस, मृत सागर के किनारे  रेगिस्तान में चारों ओर बीहड़ों से घिरे होने के कारण एक विहंगम दृश्य प्रस्तुत करता है। वस्तुतः यह पहाड़ी किला अत्यंत ऊंची भूमि का टीला है, जहाँ बाईबिल में वर्णित जूडिया के राजा हेरोडियस के महल के अवशेष अब भी शेष हैं। ईसा के जीवनकाल के दौरान ही जॉन द बैप्टिस्ट का सर यहीं कलम कर दिया गया था। इस निर्जन इलाकों में ’’विडविन’’  पहाड़ियों के ऊपर,  तो कहीं एकदम इसकी तलहटी में भेड़ बकरियाँ हांकते मिल जाएंगे। परन्तु वस्तुतः इन रेगिस्तानी इलाकों में घास का एक तिनका भी नहीं मिलता, आखिर ये जानवरों को खिलाते क्या हैं, यह भी एक शोध का विषय है। संभवतः ये जानवर मिट्टी खाने के आदी होंगे। माऊंट नीबो ही पेट्रा के बाद वो दूसरी जगह है जहाँ पर्यटक सबसे अधिक संख्या में आते हैं। बाईबिल और कुरान में वर्णित पैगम्बर मोजेस का यह स्थान आखिरी पड़ाव होने के कारण मुस्लिम, यहूदी और ईसाई तीर्थ यात्रा का यह एक प्रमुख स्थान है।

अम्मान से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ऐतिहासिक शहर मडाबा अपने ऐतिहासिक और सदियों पुराने मोजाईक के लिए जाना जाता है। मुस्लिम बाहुल्य जॉर्डन के इस शहर में लगभग 25 चर्च और 25 मस्जिद हैं। दुनिया के सबसे प्राचीन तीन चर्चों में से एक ग्रीक ऑर्थोडाक्स चर्च यहीं है। यहाँ भाईचारा है और धर्म आड़े नहीं आता। सबसे आश्चर्यजनक पहलू यह कि इस देश के कमोवेश समस्त गाइड मुस्लिम हैं जो ईसाई तीर्थयात्रियों को बाईबिल का पाठ पढ़ाते हैं। उनके बाईबिल के ज्ञान के आगे ईसाई धर्म के पंडित लज्जित ही होंगे।

बैपटिज्म साईट मृत सागर के करीब और जॉर्डन नदी के किनारे स्थित है। कुछ इतिहासकार बैपटिज्म साईट को मौजूदा फिलीस्तीन वाले जॉर्डन नदी के भाग को बताते थे, किन्तु खनन में पुरानी इमारतों के अवशेष प्राप्त होने तथा दूसरे तथ्यों के आधार पर यह तय हो गया है कि ईसा का बपतिस्मा वर्तमान जॉर्डन देश के हिस्से वाले जॉर्डन नदी में हुआ था। हालाँकि फिलीस्तीनी भाग के बैपटिज्म साईट में प्रार्थना  हेतु कई शेड बनाये गए हैं और पर्यटक व तीर्थयात्री पवित्र स्नान हेतु उसी छोर से ज्यादा आते हैं। पोप जॉन पॉल की यहाँ की यात्रा व उनकी इस मुहर के बाद इस जगह की अहमियत और बढ़ गई और अब यह यूनेस्को के विश्व धरोहर में शामिल हो गया है। जॉर्डन नदी  जॉर्डन, फिलीस्तीन और इजराएल देश की सीमा है। ये सारे देश राजनीतिक कारणों व झगड़ों से संकटग्रस्त हैं, जबकि जॉर्डन अपेक्षाकृत सुरक्षित है। और इसी कारण इस देश में सीरियाई और फिलीस्तीनी शरणार्थी सबसे ज्यादा हैं।

जॉर्डन नदी के तट वाले भू-भागों में मरूस्थलीय पेड़- पौधों की भरमार है। इस निर्जन इलाके में रेतीली और रेगिस्तानी झाड़ियों के बीच विभिन्न ईसाई सम्प्रदायों के अलग-अलग स्थानों में कई छोटे-बड़े चर्च बने हुए हैं जैसे ऑर्थोडॉक्स, ग्रीक ऑर्थोडॉक्स, कॉप्टिक, कैथोलिक, आर्मीनियन ऑर्थोडॉक्स इत्यादि। बंद पड़े इन धार्मिक स्थानों में कोई तो दिखा नहीं, निर्जन इलाकों में बिना मानव के ये चर्च स्मारक ही ज्यादा प्रतीत होते हैं। बैपटिज्म साईट में नदी इतनी संकरी कि दो-तीन मिनट में एक छोर से दूसरी छोर आया जाया जा सकता हैं। बमुश्किल 25-30 फीट का फासला, पर सवाल यहाँ देश की सीमा से है जो एक-दूसरे को बाँटती है।

इस देश में पशु पक्षियों का अता पता नहीं, पर मृत सागर के किनारे झाड़ियों पर भारत में पाये जाने वाले स्थानीय मैना, पंडुक व गौरैया पक्षियों की चहचहाहट सुनकर सुखद आश्चर्य के साथ दिल को बड़ा सुकून हुआ। जॉर्डन में आतिथ्य एक मुख्य सांस्कृतिक मूल्य है। जॉर्डन का हाशमाइट साम्राज्य इस्लामिक राज्य होने के बावजूद धार्मिक रूप से अन्य धर्मों को लेकर बहुत उदार है और पूरे अरब में अपनी इसी विशिष्टता के कारण यह देश अन्य मुस्लिम राष्ट्रों से भिन्न है किन्तु शरणार्थी समस्या के कारण अपनी उदारवादी छवि के बावजूद चरमपंथ को कब तक रोकने में सफल होगा, कहा नहीं जा सकता,क्योंकि इस देश से  ढेर सारे लोग इस्लामिक स्टेट में शामिल हो चुके हैं।

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सबसे उदारवादी मुस्लिम राष्ट्र है – जॉर्डन

विनय प्रकाश तिर्की

श्री विनय प्रकाश तिर्की, छत्तीसगढ़ में वरिष्ठ शासकीय अधिकारी हैं । श्री तिर्की समसामयिक विषयों में गहरी पकड़ रखते हैं । देश-विदेश घूम कर संस्कृतियों के गहन अध्ययन, उनकी सामाजिक सोच, राजनैतिक स्थितियों, उनकी परंपराएं और उनके पीछे की वजहों को जानने की उत्कंठा से प्रेरित श्री तिर्की, साल के दो माह, अपनी छुट्टियों में यायावर हो जाते हैं । "मैं हमेशा यात्रा पर रहना चाहता हूँ, चाहता हूँ कि वो दुनिया जिसमें रहने के लिए ईश्वर ने हमें भेजा, अधिक से अधिक देख ली जाए। जब ईश्वर मुझसे मेरे पाप-पुण्य का हिसाब पूछेगा, तब मैं उसे कहना चाहता हूँ कि आपने मनुष्य को बहुत छोटा जीवन दिया, इतना छोटा कि जितने में वो आपकी बनाई पूरी दुनिया भी नहीं देख सकता, क्योंकि उसे इस दरमियान पाप और पुण्य भी तो करने होते हैं ताकि वो आपके बहीखातों में अपना नाम दर्ज करा सके। मैं अपनी यात्राओं को यात्रा कहना ही पसंद करता हूँ, ना कि पर्यटन, क्योंकि एक यात्री वो देखता है जो दिख रहा होता है, जबकि एक पर्यटक वो देखता है जो वो देखने आया है। यात्राएँ हमेशा कुछ नया सिखाती हैं, जैसे कि सेंट अगस्टाईन ने कहा था ‘‘दुनिया एक किताब की तरह है और जो यात्रा नहीं करते हैं वे केवल किताब के पेज गिनते हैं’’, तो मैं सिर्फ पेज गिनने में जीवन व्यर्थ नहीं करना चाहता, बल्कि पूरी किताब पढ़ना चाहता हूँ। अगर विज्ञान फंतासियां कभी मेरे जीवनकाल में सच हुईं तो मैं किताबों की लायब्रेरी अर्थात अंतरिक्ष की भी यात्रा करना चाहूँगा। मैंने कई देशों की यात्राएँ की, जो दिखा वो देखा, ना कि वो जो मैं देखना चाहता था, इसलिए मेरे यात्रा संस्मरणों में अधिकांशतः लीक से हटकर स्थानों का उल्लेख होता है, मैं इसके लिए कभी आलोचना भी झेल चुका हूँ, खासतौर से पाकिस्तान के यात्रा संस्मरण पर। यहाँ मैं बारी-बारी से अपने कुछ देशों की यात्रा का संस्मरण आपके समक्ष रख रहा हूँ, आशा करता हूँ कि आपको पसंद आएंगें।"
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