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2 Comments

  1. जनक कुमार यादव
    April 13, 2020 @ 6:42 am

    उफ़्फ़ इतना मर्म। कहाँ कहानी के शुरुआत में एक अल्हड़ पयाग और कहां कहानी के अंत में एक जागरूक पयाग। प्रेमचंद के लेखन से कहानी के शुरू से अंत तक बांध रखा था। आखिरी पंक्तियों को पढ़ कर अभी भी विस्मित महसूस कर रहा हूँ।

  2. पवन रावत
    April 23, 2020 @ 7:59 am

    ?

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