दुःख की बदली- महादेवी का पाथेय

छायावाद स्व के अस्तित्व को समझने के लिए अन्तर्मन के गहरे पैठने का युग है। इस दौर के चारों स्तम्भों – प्रसाद, पन्त, निराला और महादेवी वर्मा ने स्व-अन्वेषण के निष्कर्षों की अभिव्यक्ति गद्य एवं पद्य दोनों रूपों में की है। इन चारों रचनाकारों के रचना-कर्म में सर्वाधिक विषय-वैविध्य जिसकी रचनाओं में मिलता है, वह […]