Close
Skip to content

7 Comments

  1. हरीश गुप्ता
    January 17, 2019 @ 11:06 am

    बहुत ही भावुक कहानी… भावनाओं का बखूबी वर्णन। लेखिका सुनीता सिंह जी को बधाई।

  2. Mukesh Devrani
    January 17, 2019 @ 4:16 pm

    नारी मन की थाह लेने वाली मर्मस्पर्शी कहानी के लिए सुनीता जी को बधाई

  3. विक्की
    January 20, 2019 @ 5:51 pm

    बढ़िया बहुत बढ़िया 2 बार पढ़ा हु ईमानदारी से बोलू तो दूसरी बार समझ आया ? बहुत संवेदन शील

  4. विकास नैनवाल
    January 21, 2019 @ 12:41 pm

    मर्म को छूती हुई कहानी।

  5. puneet
    July 5, 2019 @ 4:38 pm

    behtareen, umda kahani. shabd kam hain prasansha ke liye Kahani ka ant dil ko chhu gaya.Sunita ji ko bahut bahut badhai.

  6. Lokesh Gautam
    April 21, 2021 @ 12:05 pm

    बहुत ही बढ़िया कहानी, लाजवाब कर दिया।
    अंतिम पंक्ति पढ़ कर समझ में आया को शीर्षक ‘ब्याहता’ क्यों था।

  7. Priyanka
    May 31, 2021 @ 8:49 pm

    भावों से ओत प्रोत कहानी। बहुत सुंदर! ?

Leave a Reply