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एक रीडर के तौर पर आपने किसी भी पुस्तक को स्टार्ट करने के बाद महसूस किया होगा कि किसी पुस्तक का पहला चैप्टर ही रीडर के मन मे उस पुस्तक को खत्म करने का बीज बो देता है।

एक लेखक के तौर पर भी अमूमन यही सलाह वरिष्ठ लेखकों से मिलती है कि वे पहले अध्याय को इस तरह प्रेजेंट करें कि रीडर उसे पढ़ते ही उस पुस्तक को पूरा खत्म करने का मन में ठान ले।

वहीं, पहले अध्याय का, इतना शानदार होना इसलिए भी जरूरी हो जाता है ताकि जब आपकी कहानी का ड्राफ्ट एडिटर के पास पहुंचे तो उसे पहला चैप्टर पढ़ने से आपकी कहानी पर विश्वास हो जाये। जहां इस देश में, एडिटर हर नए लेखक के ड्राफ्ट को, उसकी कहानी को, अपनी कुर्सी के पीछे रखे गुप्त डस्टबिन में रख देता हो, वहां यह बहुत महत्वपूर्ण है कि पहला चैप्टर ही आपकी कहानी के लिए आपकी पहचान क्रिएट कर दे।

यू नो – फर्स्ट इम्प्रैशन इस लास्ट इम्प्रेशन।

खैर, एडिटर्स तो एडिटर्स हैं, एक लेखक का प्राइम फोकस वैसे भी रीडर पर होना चाहिए। क्योंकि जब एक रीडर किताब खरीदता है तो आपकी कहानी के प्रति पढ़ने का डेडिकेशन दिखाने के लिए उसके पास बहुत कम कारण होते हैं। अब आप सिर्फ इस कारण को मुख्य तो नहीं मान सकते कि उसने पैसे खर्च करके आपकी किताब खरीदी इसलिए वह उस पूरा पढ़ेगा भी। इसलिए लेखक को पाठकों को पहले चैप्टर में ही ऐसे कंटेंट देने होंगे जिससे वह आपकी कहानी के प्रति अपना कमिटमेंट दिखाए। लेखकों को रीडर्स के सामने ऐसे किरदार पेश करने होंगे, ऐसी समस्याएं पेश करनी होंगी, ऐसी दुनिया पेश करनी होगी जो कि उसके लिए नई हो, अलग हो। भले ही वैसी दुनिया और वैसे किरदार, हज़ारों लेखकों ने पहले भी लिखा हो लेकिन आपकी प्रस्तुतिकरण ऐसी होनी चाहिए जिससे वह खुद को कहानी के साथ जोड़ ले।

तो एक लेखक को पहले चैप्टर को लिखने के क्या करना होगा? कैसे लेखक अपनी कहानी के पहले चैप्टर को पाठक को पढ़ने के लिए मजबूर करेगा?

प्रत्येक कहानी में, कोई न कोई प्रॉमिस मौजूद होता है जो कि किसी भी पुस्तक का आधारभूत ढांचा होता है। हर विधा के अनुसार, प्रॉमिसेस अलग अलग हो सकते हैं और वे कहानी के मुख्य थीम को प्रभावित करते हैं। कोई भी प्रॉमिस, रीडर को दो प्रकार से प्रभावित करता है – इमोशनल (भावनात्मक रूप से) या इंटेलेक्चुअल (समझ के अनुसार)।

इमोशनल (भावनात्मक रूप वाला) प्रॉमिस पाठक से कहता है – आप इस कहानी को पढ़िए और खुद को रोमांचित, गुदगुदा और नॉस्टेलॉजिक आदि पाएंगे। वहीं इंटेलेक्चुअल (‘समझ के अनुसार’ वाला) प्रॉमिस रीडर से कहता है – जब तुम इसे पढ़ोगे तो तुम एक नई दुनिया में सैर कर रहे होंगे, तुम्हारा इस दुनिया के प्रति विश्वास बढ़ेगा और तुम जान पाओगे कि तुम्हारी दुनिया से कहीं ज्यादा मजेदार दुनिया यहां है।

ये प्रॉमिसेस कहाँ नज़र आएंगी – ये नज़र आएंगी आपके इंट्रोडक्शन चैप्टर में, अर्थात पहले चैप्टर में। किस कहानी में, किस प्रकार का प्रॉमिस रखना है, यह आपके द्वारा लिखी जा रही कहानी के विधा पर निर्भर करेगा। आपकी कहानी की थीम में, आपके प्रॉमिस का पूरा दखल होना चाहिए, वरना ऐसा लगेगा कि आपने रीडर के विश्वास को धोखा दिया है। रोमांटिक नावेल के रूप में कहानी को शुरू करके बाद में साइंस फिक्शन में बदल देना तो रीडर के साथ अन्याय हुआ न। क्योंकि रोमांटिक नावेल के पहले अध्याय में आपका ध्यान ‘इमोशनल प्रॉमिस’ पर रहेगा, तो पाठक भी पहले चैप्टर से यही माइंडसेट बना कर चलेगा। लेकिन आगे उसे एक अलग ही दुनिया देखने को मिलेगी,एक अलग ही थीम नज़र आएगा।

एक और बात है जो हमें पहला चैप्टर लिखते समय ध्यान देना चाहिए – वह है – पहले चैप्टर की – ओपनिंग लाइन। आपके पहले चैप्टर की पहली लाइन आपके पाठक को बताएगी की आगे की कहानी में किसके साथ कैसे टकराव होने वाले हैं।

स्टीफन किंग कहते हैं कि ओपनिंग लाइन रीडर को कहानी का आरंभ करने के लिए आमंत्रित करता है।

ओपनिंग लाइन ऐसी हो कि वह रीडर से कहे – सुनो, यहां आओ, तुम मेरे बारे में जानना चाहते हो न।

वहीँ कहानी के प्रस्तुतकर्ता पर भी कई पुस्तकों का जीवन निर्धारित होता है। जैसे कि फर्स्ट पर्सन में लिखी गयी कहानी एक व्यक्ति के पॉइंट ऑफ व्यू पर ही आधारित होती है लेकिन अगर यह किरदार मजबूत रहा हो तो बहुत फर्क पड़ेगा। उस किरदार की आवाज ऐसी होनी चाहिए कि पाठक खुद को उससे बांध लें।

हालांकि होने को तो और भी कई फैक्टर्स, पहले चैप्टर के लेखन के संबंध में। हो सकते हैं, लेकिन ये ही कुछ हैं जिसकी जानकारी आपके खादिम को है। आशा है, उपरोक्त जानकारियां आपको समझ आएंगी जिसे आप अपने लेखन जीवन में इस्तेमाल करेंगे।

आभार
राजीव रोशन

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