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2 Comments

  1. NUTAN SINGH
    April 4, 2021 @ 5:15 pm

    Bahut hi sundar kahani ,magar bina naukari mile pardes gaman me nadani ki jhalak dikhi.Betiyaan to ham sab ke ghar hain to kya desh se bahar hi unka bhavishya hai?.Hamsafar ke saath hote huye bhi sabko apna safar akele hi tay karna hota hai ,apnon se durr hote dukhi man ka sundar chitran .

    • Hema
      April 6, 2021 @ 6:53 am

      कुछ नादान होना हौसलों को आज़ादी देता है वरना समझदारी तो बड़ी सख़्त वार्डन होती है हौसलों की। बेटियों का भविष्य सिर्फ़ देश के बाहर ही है ऐसा कहना तो अतिशयोक्ति होगा। लेकिन देश के बाहर सुरक्षा अधिक है और इस वजह से सोच का दायरा बड़ा हो जाता है। निडर होकर, बेफ़िक्र होकर जीने का स्वाद भारत में तो मिलना बहुत ही मुश्किल है। नूतन जी, आपने लेख पढ़ा और अपने प्रश्न लिखे इसके लिए आपका बहुत आभार। ऐसा लगा कि मैंने कुछ कहा तो किसी ने सुना और उत्तर भी दिया। बहुत शुक्रिया ?

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