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3 Comments

  1. Sweetvickky Vickky
    April 29, 2020 @ 7:54 am

    बिना सोचे विचारे हुवा काम में वाकई एक आदमी की जान गयी …

  2. NUTAN SINGH
    April 29, 2020 @ 12:20 pm

    Kai baar jindagi ki aapa-dhapi me ham kisi k chritra ka mulyankan uski haisiyat se kar baithe hain.
    Sacchai pataa Lange k baad siwaye kachot k hamaare paas kuch nahi bachta.

  3. ख़ान इशरत परवेज़
    July 3, 2020 @ 11:03 pm

    चीजें भी हमारे ख़िलाफ षडयंत्र किया करती हैं। जिस चीज़ की आवश्यकता होती है, मौक़े पर वही ग़ायब होती है। फिर हम अनदेखे ही घर के सबसे दुर्बल सदस्य का गला दबोच बैठते हैं। हद तो यह है कि एक दिन सहसा ही बागी वस्तु किसी डिब्बे या अलमारी के कोने से सहसा ही प्रकट हो जाती है और याद आता है कि इसे तो खुद ही उस जगह पर रखा था। तब हमारी आत्म ग्लानि की सीमा नही होती है। बहुत ही मार्मिक और ह्रदयस्पर्शी कहानी।?

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