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खड़ा हिमालय बता रहा है
डरो न आंधी पानी में।
खड़े रहो तुम अविचल हो कर
सब संकट तूफानी में।

डिगो ना अपने प्राण से, तो तुम
सब कुछ पा सकते हो प्यारे,
तुम भी ऊँचे उठ सकते हो,
छू सकते हो नभ के तारे।

अचल रहा जो अपने पथ पर
लाख मुसीबत आने में,
मिली सफलता जग में उसको,
जीने में मर जाने में।

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हिंदी साहित्य चर्चा का मंच कथा -कहानी ,कवितायें, उपन्यास. किस्से कहानियाँ और कविताएँ, जो हमने बचपन में पढ़ी थी, उन्हें फिर से याद करना और याद दिलाना
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