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2 Comments

  1. विक्की
    September 22, 2018 @ 10:12 am

    विचलित कर दिया दुखी भी

  2. Amit Wadhwani
    September 22, 2018 @ 6:35 pm

    बहुत पहले पढ़ी आचार्य जी, इनकी कहानियों के संकलन की कई किताबें है पर कहानियां कुछ ही पढ़ी हुई है, पढ़ते ही मन अवसाद से भर गया, फिर कभी हिम्मत नहीं हुई किताब उठाने की आज कई दिनों बाद यह कहानी पढ़ी, इसी पर हालिया एक फिल्म भी आयी है, मंटो नहीं, इस कहानी पे।

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