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मिस्ट्री ऑफ़ द मंथ : नवम्बर २०१७

ऑफिस में लाश

अंतिम तिथि:- १५ नवम्बर, २०१७

 

ईशा नरूला का आज न सिर्फ मूड खराब था बल्कि वह ऑफिस पहुँचने में भी लेट हो रही थी और ऑफिस लेट पहुंचना उसकी आदतों में शामिल नहीं था। वह दोपहर १२:३५ में ऑफिस पहुँच रही थी। वह सिर्फ लेट ही नहीं हुई थी बल्कि सुबह ११:१३ AM से हो रहे मुसलाधार बारिश के कारण वह भींग भी गयी थी। उसे यह वक़्त इसलिए इसलिए याद था क्यूंकि तभी उसकी कार के सामने वाले पारदर्शी शीशे पर बारिश की बड़ी-बड़ी बूँदें आ कर गिरी थी और उसकी कार में लगे डिजिटल घड़ी की ओर उसका ध्यान गया था। उसने, फरीदाबाद, एन.आई.टी. एरिया स्थित, प्रकाश टावर के सामने बनी पार्किंग में अपनी कार खड़ी की और छोटे से छाते से स्वयं को बारिश से बचाते हुए प्रकाश टावर में घुसी। जब तक वह बिल्डिंग में घुसी तब तक वह भीग चुकी थी और इसके लिए उसने अपने छाते को बहुत कोसा जो अपना काम सही से नहीं कर सका। प्रकाश टावर में, उसकी मंजिल छठे माले पर स्थित, आहूजा मार्केटिंग कंपनी थी, जहाँ वह वाईस प्रेसिडेंट के पद पर काम करती थी। प्रकाश टावर में आहूजा मार्केटिंग कंपनी के पास २ फ्लोर थे, ५ वें फ्लोर पर लोवर लेबल के स्टाफ कार्यरत थे जबकि छठे फ्लोर पर बस प्रेसिडेंट, वाईस प्रेसिडेंट एवं जनरल मैनेजर एवं उनके असिस्टेंट का ऑफिस था।

सैंतीस वर्षीया ईशा जब अपने फ्लोर पर पहुंची तो उसे ७-८ खाकी वर्दी पहने पुलिसवाले नज़र आये और ऐसा लग रहा था कि वो उसका ही इंतज़ार कर रहे थे। किसी के भी द्वारा सवाल किये जाने से पहले ही उसने पूछा – “यहाँ हो क्या रहा है?”

सभी पुलिसवालों में से एक पुलिसवाला ईशा के सामने आया जिसके सिर पर पीक कैप और कंधे पर १ स्टार का तमगा, उसके असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (ASI) होने की चुगली खा रहा था। वह ४५ वर्षीय, हरियाणा पुलिस में, फरीदाबाद NIT थाने से सम्बंधित था। उसके खाकी शर्ट पर लगे नेमप्लेट से उसका नाम ‘हरीश ठुकराल’ नुमायाँ हो रहा था। उसने उत्तर देने के बजाय ईशा से सवाल किया – “क्या आप ईशा नरूला हैं?”

“हाँ।” – उसने उत्तर देते ही सवाल पूछा – “लेकिन, यहाँ चल क्या रहा है?”

“आपके ऑफिस में एक मृत व्यक्ति पाया गया है जिसकी खबर हमें आपकी असिस्टेंट मिस शुक्ला ने दिया है। मृत व्यक्ति के पर्स में मौजूद कागजात से हमने उसे अमित नेगी के रूप में पहचाना है। क्या आप इस नाम के व्यक्ति को जानती थी?”

ईशा ने अपने चेहरे पर भावनाओं का प्रदर्शन न करते हुए उत्तर दिया –“हाँ, आज मेरे ऑफिस में उनके साथ मीटिंग फिक्स थी। कैसे हुआ ये सब?”

“उसकी हत्या हुई है,” – पुलिसवाले ने गौर से ईशा को देखा और बोला – “उसकी छाती में लैटर ओपनर घोपा गया है। हमें मिस्टर नेगी के पास उनका मोबाइल फ़ोन और ब्रीफ़केस मिला है।” – वो पुलिस वाला इतना घाघ था कि उसने ईशा को यह नहीं बताया कि अपने अंजाम तक पहुँचने से पहले मिस्टर नेगी ने अपने आपको बचाने की भरपूर कोशिश की थी।

ईशा ने अपने अन्दर कुछ ऐसा महसूस किया जैसे उसको चक्कर आ रहा हो। उसके पेशानी पर पसीने की बूंदे निकलने लग गयी, लेकिन बिना किसी दिखावटी भावनाओं के उसने पूछा – “किसने किया मिस्टर नेगी का खून?”

हरीश ठुकराल ने उत्तर दिया – “अभी हम इसके बारे कुछ पता नहीं लगा पाए हैं” – उस पुलिसिये की नज़र ईशा के भीगे कपड़ों पर पहुंची तो उसने एक ओर ईशारा करते हुए, जो कि उस फ्लोर पर बने सेंट्रल हॉल का दरवाजा था, बोला – “आप भीग गयी हैं, पहले स्वयं को सुखा लीजिये फिर हमें कांफ्रेंस रूम में मिलिए।”

ईशा नरूला ने सम्मानित भाव से उत्तर दिया – “शुक्रिया”। कुछ समय बाद ही वो कांफ्रेंस रूम में घुस रही थी तो उसने पाया कि वहां उसकी असिस्टेंट शिवानी शुक्ला पहले से ही उसके बॉस और कंपनी के प्रेसिडेंट महेश अहुजा के साथ बैठी हुई थी। ईशा की मार्केटिंग टीम का ही एक सदस्य विशाल कुमार भी वहां मौजूद था। उसने जल्दी से अपना सीट ग्रहण किया तो उसकी नज़र दरवाजे पर खड़े कांस्टेबल पर पड़ी जो कि इस बात का ख्याल रख रहा था कि कौन अन्दर-बाहर आ-जा रहा है।

असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर हरीश ठुकराल ने चारों को देखा तो नोट किया कि महेश आहूजा को छोड़कर बाकी तीनों औसतन ३५-४० वर्षीय एवं शारीरिक क्षमता के हिसाब से ठीक थे। प्रेसिडेंट महेश अहुजा एक अपवाद के रूप में, ५८ वर्षीय, मोटा एवं थुलथुल शरीर वाला व्यक्ति था।

हरीश ठुकराल ने बोलना शुरू किया – “मिस शुक्ला को लाश ११:५१ पर मिला। मिस नरूला जैसा कि आप जानती हैं कि मिस्टर नेगी की आपसे मीटिंग की अपॉइंटमेंट १२:१५ बजे थी। मिस शुक्ला कहती हैं कि उन्हें नहीं पता कि मिस्टर नेगी छठे फ्लोर पर आपके ऑफिस में कैसे घुसे। मैं जानता हूँ कि आप सभी को बताने की यह जरूरत नहीं कि सीढ़ियों के द्वारा इस फ्लोर पर खुलने वाला दरवाजा बंद था और लिफ्ट के जरिये इस फ्लोर पर पहुँचने के लिए कार्ड की जरूरत होती है। अब, मिसेज नरूला के ऑफिस में घुसने के लिए भी पास-की(एक प्रकार का कार्ड) की जरूरत होती है और वह कार्ड सिर्फ मिसेज शुक्ला और मिसेज नरूला के पास ही उपलब्ध है। मिसेज शुक्ला का कहना है कि जब वे कॉफ़ी लेने के लिए किचन में घुसी तो उन्होंने अपना कार्ड वो बाहरले डेस्क पर रख दिया था। सिक्यूरिटी का कहना है कि ११:५१ बजे से पहले छठे फ्लोर तक पहुँच सिर्फ चार लोगों की थी” – सब इंस्पेक्टर ने चारों को देखते हुए अपनी सांस को स्थिर करते हुए बोला – “और वो चारों आप लोग हैं। आपमें से कोई मुझे बताये इससे पहले ही मैं आपको बताना चाहूँगा कि मिसेज नरूला १०:४५ पर लिफ्ट के द्वारा निकलती हुई देखी गयी और इस बात की पुष्टि सिक्यूरिटी ने भी किया है। यह समय, मिस्टर नेगी की लाश मिलने से, १ घंटा से अधिक पहले का है।”

“सब इंस्पेक्टर, यह सच है। मैं भूल से वह अग्रीमेंट घर पर ही भूल गयी थी जो मिस्टर नेगी को देना था इसलिए मुझे घर वापिस जाकर उसे लाना पड़ा।”

सब इंस्पेक्टर ने ईशा  को देखा और बोला – “ठीक है, फिलहाल के लिए मैं आपकी बात मान लेता हूँ। सिक्यूरिटी से जो हमें पता चला है उसके मुताबिक मिस नरूला ०९:४५ पर ऑफिस पहुंची थी और मिस शुक्ला उनके बाद ०९:५९ पर पहुंची थी। १०:२५ पर विशाल कुमार जी पहुंचे। महेश अहुजा सबसे अंत में १०:४० पर ऑफिस पहुंचे थे। हरीश ठुकराल रुका और उसने आगे कुछ कहने से पहले चारों के चेहरे देखे – “इस बात की कोई संभावना नहीं बनती कि कोई पिछली रात से ही यहाँ छठे फ्लोर पर मौजूद होगा। ऐसे में ऐसी सम्भावना बनती है कि आप में से ही किसी ने अमित नेगी का क़त्ल किया है।”

ऐसा सुनते ही शिवानी शुक्ला रोने लगी। हरीश ठुकराल ने उसे कहा – “मुझे माफ़ कीजियेगा, मिसेज शुक्ला, यह दुखद है पर जरूरी है।”

महेश आहूजा ने पूछा – “क्यूँ न हम CCTV कैमरे की फुटेज के जरिये यह देखें कि मिस्टर नेगी कब इस ऑफिस में घुसे थे?”

ईशा  ने कहा – “सर, इस फ्लोर की CCTV रिकॉर्डिंग में कोई टेक्निकल फाल्ट है जिसके कारण १ हफ्ते से कोई रिकॉर्डिंग नहीं हो पा रही है। हमने एजेंसी को इन्फॉर्म किया हुआ है वे कल अपना इंजिनियर यहाँ भेजेंगे।”

“ओह, यह तो बुरा हुआ।”

हरीश ठकुराल ईशा  की तरफ मुड़ा और बोला – “आपसे शुरू करते हैं, मिसेज नरूला। आप ऑफिस ९:४५ पर पहुंची थी तो क्या आप अपने ऑफिस में भी घुसी थी?”

“हाँ, मैं अपने ऑफिस में घुसी थी तभी तो मुझे पता चला कि मैं अग्रीमेंट घर पर भूल गयी हूँ, इसलिए मुझे अग्रीमेंट को लेने एक लिए यहाँ से जाना पड़ा।”

“सिक्यूरिटी कहती है कि आप छठे फ्लोर से १०:४९ में निकली थी?”

“शायद यही वक्त हो, मुझे ध्यान नहीं।” – ईशा  ने उत्तर दिया।

“तो आपको वापिस ऑफिस पहुँचाने में १ घंटा से अधिक वक़्त कैसे लगा?” – सब इंस्पेक्टर ने पूछा।

“वो ऐसा हुआ कि, ११:१३ मिनट पर बारिश होनी शुरू हुई तो ट्रैफिक जो कि सामान्य रफ़्तार से चल रहा था वह स्लो होना शुरू हो गया। मैं पुरे वक़्त अपने कार में रही, सिर्फ उस वक़्त को छोड़कर जब मैं अपने अपार्टमेंट से वह अग्रीमेंट लेने गयी थी।” – ईशा  ने थोड़ी देर के लिए सोचा क्यूंकि हरीश ठकुराल की नज़र उसी पर थी – “मैंने अपनी कार में बैठे-बैठे ही कई कॉल किये, एक ११:१० पर अखबार एजेंसी, ११:३५ पर अपने पति के ऑफिस में कॉल किया और एक कॉल १२ बजे अपने डॉक्टर के ऑफिस में किया। मोबाइल कंपनी के रिकॉर्ड के जरिये आप पता लगा सकते हैं कि मेरा फ़ोन उस दौरान इस लोकेशन से बहुत दूर था।” –ऐसा कहते ही उसने अपना मोबाइल हरीश ठुकराल को पकड़ा दिया।

हरीश ठुकराल ने उसको धन्यवाद् देते हुए ईशा के असिस्टेंट शिवानी शुक्ला की ओर मुड़ा जिसने स्वयं को व्यवस्थित कर लिया था। वह बोला – “आप ९:५९ पर लिफ्ट से बाहर आई। जब आप यहाँ पहुंची तो क्या आपने कुछ असामान्य सा नोट किया?”

“नहीं, मैंने तो बस खिड़की से बाहर बिजलियों का गरजना देखा था।”

हरीश ठुकराल ने थोड़ी देर सोचा, फिर बोला – “क्या मिसेज नरूला ने ऑफिस से घर जाने के लिए निकलने के बाद कोई कॉल किया था?”

“नहीं, लेकिन यह अस्वाभाविक भी नहीं है। वह तभी मुझे कॉल करती हैं जब उन्हें जरूरत होती है। आज सुबह, ऑफिस से निकलने से पहले उन्होंने मुझे एक ईमेल भेजा था, जिसमें उन्होंने अपनी स्थिति के बारे में बता दिया था और कहा था कि जब मिस्टर नेगी आयें तो उनका ख्याल रखूं।”

हरीश ठुकराल विशाल कुमार की तरफ घुमा और पूछा – “आप अपने बारे में बताइये। आप यहाँ १०:२५ पर पहुंचे तो क्या कुछ असामान्य सा देखा या सुना आपने।”

विशाल कुमार ने उत्तर दिया – “नहीं।”

“क्या आपने अपने मोबाइल से इस दौरान कोई कॉल किया था या कोई कॉल रिसीव किया था, कुछ ऐसा जिससे आप यह साबित कर सकें कि आप कातिल नहीं है।”

विशाल कुमार ने घबराहट के साथ जवाब दिया – “नहीं, ऐसा कुछ भी नहीं है मेरे पास।”

हरीश ठुकराल ने कुछ क्षणों तक सोचा फिर उसने महेश आहूजा से सवाल किया – “क्या आपके पास रेनकोट है?”

“हाँ, लेकिन मैं उसे अपने साथ नहीं रखता हूँ। कंपनी की तरफ से मुझे गाड़ी और ड्राईवर मिला हुआ है। ड्राईवर हमेशा मुझे पोर्च में उतरता है इसलिए मुझे रेनकोट पहनने की जरूरत नहीं पड़ती।”

हरीश ठुकराल ने विशाल कुमार से सवाल पूछा – “और आप? क्या आपके पास रेनकोट है?”

विशाल कुमार ने घबराते हुए जवाब दिया – “नहीं, लेकिन मेरे पास एक छाता है। अगर आप उसे देखना चाहे तो देख सकते हैं वह मेरे केबिन में रखा हुआ है।”

हरीश ठुकराल ने अपनी १६ वर्षीय पुलिस की नौकरी में बहुत से केसेस देखे थे लेकिन ऐसा पहली बार देखा था। कातिल की तरफ उँगलियों के द्वारा ईशारा करते हुए उसने दरवाजे पर खड़े कांस्टेबल को बुलाया और कहा – “इस आदमी को मिस्टर नेगी के क़त्ल के इलज़ाम में गिरफ्तार कर लो।”

 

नोट:- अब आप सभी प्रतिभागियों को यह बताना है कि अमित नेगी का क़त्ल किसने किया। साथ ही आप सभी को अपने परिणाम के अनुसार इस कहानी का क्लाइमेक्स लिखना होगा जिसमें तहकीकात कर्ता द्वारा कातिल की पहचान एवं उसके लिए दिया गया तर्क बताना होगा। आपको यह क्लाइमेक्स सीन १००० शब्दों में लिख कर हमें नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में भेजना है। नीचे कमेंट बॉक्स में सबसे पहले अपना नाम डालें तदुपरांत क्लाइमेक्स सीन लिखकर भेजें। अंतिम तिथि:- १५ नवम्बर, २०१७

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