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लेखन में परफेक्शन

परफेक्शन अर्थात पूर्णता, सिद्धि एवं प्रवीणता, आज के समय की जरूरत बन गयी है। हर चीज में परफेक्शन लाजमी होती जा रही है। आप जिस मशीन पर काम करते हैं, उसने परफेक्ट काम करना जरूरी है – आपका बॉस हमेशा आपसे परफेक्ट की उम्मीद लगाये बैठता है – आप भी किन्हीं अदाकारों, खिलाड़ियों से परफेक्ट की उम्मीद लगाए बैठते हैं – उसी तरह लेखक से हर पाठक को परफेक्शन की उम्मीद रहती है। लेकिन यह यहीं तक सीमित नही रहता, यहाँ तक कि लेखक भी अपनी कहानी को परफेक्ट बनाने में लगा रहता है। वैसे ये वाजिब बात भी है, जब तक लेखक परफेक्शन देगा नही तब तक पाठकों को वह कहां से नज़र आएगा।

वैसे बताना चाहूंगा कि परफेक्शन के चक्कर में, कई दफा लेखकों को ‘राइटर्स ब्लॉक’ नामक बीमारी से बीमार होकर गुजरना पड़ता है। लेखकों के साथ कई बार ऐसा होता है कि लेखन के दौरान उसे इंटरनेट पर कुछ सर्च करने की जरूरत पड़ जाती है, ऐसे में अगर नेट न चले तो, वह इंटरनेट की रेंज बाहर हुआ तो, उसके मोबाइल पर नेटवर्क ही आया तो– सोचिये कितना बड़ा बवाल मच जाएगा लेखक के लिए उस वक़्त। यह वही समय होता है, जब लेखक अपनी रचना को बीच में छोड़, इंटरनेट की सेटिंग ठीक करना, मोबाइल का टावर पकड़वाने के लिए हाथ में मोबाइल ऊपर उठाये फिरना या कस्टमर केअर से बात करना शुरू कर देता है। मतलब अच्छा खासा बंदा लिख रहा था, क्या शानदार फ्लो थी लेखनी की, लेकिन ये मुआ इंटरनेट ने सब गड़बड़ झाला कर दिया। यही समय होता है जब लेखक अपने हाथ रोक लेता है। यहीं उसके लिखने की स्पीड पर दुष्प्रभाव पड़ता है, साथ ही एक मानसिक रुकावट उसके मन में घर बना लेती है।

इससे बचने का साफ-साफ, सीधा-सीधा उपाय यह है कि जिस स्थान पर आपको इंटरनेट से रिसर्च करके कंटेंट डालना है, वहां X लिख दीजिये। आपको बता दूं, गणित में x, y, z इत्यादि को वेरिएबल के रूप में लेते थे और जब भी हमें, किसी अमुक के बारे में नही पता होता था तो कुछ मानना होता था, हम झट से उसे X मान लिया करते थे। जैसे कि माना ‘रामु ने x घंटे काम किया’ आदि। बिल्कुल उसी तरह अमुक रिसर्च वर्क को आप x मान लीजिए और अपने फ्लो को बरकरार रखते हुए कहानी को खत्म कीजिये। बाद में जब आपके मोबाइल पर इंटरनेट चलने लगे जाए या आप ऐसे रेंज में पहुंचे जहां इंटरनेट की सेवा में बाधा न होती हो – तब उस x के लिए रिसर्च कीजिये और अपनी सुविधानुसार रिप्लेस कर दीजिए।

परफेक्शन बहुत ही शानदार विशेषता है लेकिन यह कई बार खतरनाक भी साबित हो सकता है। आप अपने लेखन को एक बार में परफेक्ट तो नहीं कर पाएंगे। आपको पहले ड्राफ्ट के उपरांत एडिटिंग करना ही पड़ेगा। तो फिर काहे की इतनी जल्दी कि परफेक्शन के चक्कर में, अपना और कहानी दोनों का बेड़ागर्क कर लें। तो, भैया मान लो न x है।

#amwriting

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