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दोस्तों हम जासूसी उपन्यास पढ़ते हैं| हालाँकि मैं जो जानकारी आपको देने जा रहा हूँ हो सकता है आप में से कई को वो पहले ही पता हो, पर कई पाठक किशोर वय के होने के कारण ये जानकारियां जान नहीं पाते| उनके लिए ये लाभ दायक सिद्ध होगी| भारत में अंग्रेजो के बाद प्रशासनिक और कानूनी ढांचे को इस तरह बांटा गया है की प्रशासन का सबसे अदना मुलाजिम गाँवों में पटवारी होता है| उस पर स्टेट सेवा के तहसील दार, उपखंड अधिकारी, अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट होते है| जिला स्तर पर सिविल सेवा के टॉप बॉस आईएएस जिला मजिस्ट्रेट यानि कलेक्टर होता है| आईएएस ही सरकार में विभिन्न विभागों के मुखिया सचिव होते हैं|

पुलिस तंत्र भी अदना सिपाही हवलदार, कांस्टेबल, हेड कांस्टेबल, सब-इंस्पेक्टर, सर्किल इंस्पेक्टर तक होता है| थाने में सर्किल इंस्पेक्टर स्तर तक अफसर बैठता है| इसे स्टेशन हेड ऑफिसर भी बोला जाता है| किसी किसी थाने में एस.एच.ओ. और अतिरिक्त एस.एच.ओ. भी होते हैं| थानों पर डिप्टी सुपरिन्टेन्डेन्ट पुलिस होता है और सभी  डिप्टी पर सुपरिन्टेन्डेन्ट ऑफ़ पुलिस| बड़े १० लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों में कमिश्नर प्रणाली होती है जिसमे निचले स्तर पर वो ही तंत्र होता है पर थाने के बाद डिप्टी कमिश्नर ,कमिश्नर इत्यादि होते हैं|

एक स्टेट को कई जिलो में बांटा गया है| जिलो का एक डिवीज़न होता है जिस पर डिवीज़नल कमिश्नर, डी.आई.जी. बैठते है| वे अपना फोकस कानूनी कार्यवाही पर रखते है| किसी भी अपराधिक गतिविधि की या गैर कानूनी कार्य की FIR यानि प्रथम सुचना रपट दर्ज होती है| इसकी जांच किसी सब इंस्पेक्टर को सौंपी जाती है| बड़े केसों को खुद इंस्पेक्टर देखता है| जो की वारदात की जगह जाकर तफतीस करता है| हत्या आत्महत्या चोरी जैसे केशो में पंचनामा तैयार किया जाता है| पंचनामा वारदात की जगह और हालत की वो रिपोर्ट होती है जिस पर कम से कम ३ प्रतक्ष्य दर्सियो के हस्ताक्षर होते हैं| पहले ५  के हुआ करते थे| इंस्पेक्टर किसी भी संदिग्ध को पूछ ताछ के लिए हिरासत में लेकर थाने लाकर पूछताछ कर सकता है और प्रयाप्त सबूत हो तो गिरफ्तार कर सकता है| गिरफ़्तारी के २४ घंटे में व्यक्ति को मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना होता है| मजिस्ट्रेट अपराध की गंभीरता अनुसार जमानत या रिमांड देता है| जमानत कोई परिचित देता है साथ ही पैसे भी जमा कराता है| जमानत केस पूरा हो जाने पर लौटा दी जाती है| मजिस्ट्रेट छोटीमोटी सजा या फाइन कर सकता है| केस का फैसला जज करता है| इसी तरह जज जमानत रिमांड इत्यादि कारवाही नहीं कर सकता| ये मजिस्ट्रेट के काम है| जमानत पर छूटे व्यक्ति को समयसमय पर पुलिस और अदालत में पेश होना होता है| रिमांड वाले व्यक्ति को थाने में लॉक उप में रखा जाता है और कड़ी पूछ ताछ की जाती है|

ज्यादा विस्तार से की किस अपराध में कानून की कौनसी धारा लगाती है| कौनसा अपराध जमानती है या नहीं| पुलिस को कैसे कार्य करना है क्या शक्तिया है ये सब कानून की ही एक किताब क्रिमिनल प्रोसीजर कोड पढ़ कर जान सकते हैं| बड़े मेट्रो शहरों में तफतीस को इनक्वेस्ट भी कहा जाता है और जांच अधिकारी बड़े केसों में कॉरोनर कहलाता है| पुलिस केस की जांच कर केस और अपराधी को मयसबूत अदालत में पेश करती है| जहाँ सरकारी वकील और मुजरिम का वकील जिरह करते है| आखिर में फैशला जज सुनाते हैं|

 

जिला स्तर पर सेशन जज होते हैं| ये पेनल या एग्जीक्यूटिव कोर्ट होता है, सब सजायें जिनमे फांसी भी शामिल है, ये ही कोर्ट देता है| इस से ऊपर हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट है, जो appellant कोर्ट है जिनमे सजा नहीं दी जाती बल्कि अपील पर फैसला किया जाता है की सेसन कोर्ट की सजा बरक़रार रखनी है या नहीं|

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Short Brief on Indian Judiciary, Police and Administration system
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