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मनोविश्लेषणवाद

फ्रायड ने मानव मस्तिष्क के तीन भाग चेतन, अवचेतन और उपचेतन किये. उन्होंने काम और व्यक्ति की दमित भावनाओं को सर्वाधिक महत्व दिया. फ्रायड के शिष्य एडलर ने काम की जगह अहम को मुख्य माना जबकि उनके एक अन्य शिष्य युंग ने दोनो को एक साथ रखा. मनोविश्लेषणवाद के इन सिद्धांतों को आधार बनाकर जो साहित्य रचा गया, उसे मनोविश्लेषणवादी साहित्य कहते हैं. हिंदी में इलाचंद्र जोशी,जैनेन्द्र, अज्ञेय आदि इसी विचारधारा से प्रभावित साहित्यकार हैं. जैनेन्द्र ने मनोविश्लेषणवादी सिद्धांतों को गांधीवाद के साथ जोड़कर अपनी कथाभूमि निर्मित की तो दूसरी ओर इलाचन्द्र जोशी मनोविश्लेषणवाद के साथ-साथ मार्क्सवादी सिद्धांतों से प्रभावित दिखते हैं. इस लिहाज से देखें तो अज्ञेय को शुद्ध मनोविश्लेषणवादी रचनाकार कहा जा सकता है.