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सस्पेंस के लिए चार जरूरी कारक हैं – पाठकों की सहानुभूति, पाठकों की चिंता, करीब से करीबतर खतरे और बढ़ता तनाव।

पाठकों की सहानुभूति हासिल करने के लिए किरदार को महत्वाकांक्षा, इच्छा, घाव, आंतरिक संघर्ष आदि भावों का गहना पहना सकते हैं, जिससे पाठक उनके साथ जुड़ाव महसूस करे। जितना अधिक पाठक और किरदार के साथ सहानुभूति का बंधन मजबूत होगा उतना ही पाठक कहानी के साथ खुद को जोड़ पायेगा। एक बार किरदार के साथ जुड़ाव महसूस हो जाने के बाद, जब पाठक उसके बारे में सोचने लगता है तो वह अपना सबकुछ ये देखने में झोंक देता है कि किरदार किस तरह उस चीज को पाता है जो वह पाना चाहता है।

लेखक को चाहिए की ऐसा माहौल बनाए जिससे पाठक किरदार के बारे में यह चिंता करने लग जाए कि जो वह चाहता था वह उसे मिला की नहीं या मिलेगा की नहीं। जब पाठक जान जाते हैं कि किरदार को क्या चाहिए तभी वह जान पाते हैं कि बाजी पर क्या लगा हुआ है। और जब वे यह जान जाते हैं कि बाजी पर क्या लगा है तब वे खुद को कहानी में ज्यादा मसरूफ पाते हैं। अपनी कहानी में, पाठक के मगन हो जाने लायक कुछ  चीजे डालनी होती हैं जैसे कि – आपका किरदार को किस चीज की अभिलाषा है, कौन उसे अपनी अभिलाषा, अपनी इच्छा को पूरा करने में रुकावट बन रहा है और अगर वह अपनी इच्छा को पूरा नहीं कर पाता है तो उसके साथ क्या घटनाएं घटेंगी – उसका क्या अंज़ाम होगा।

सस्पेंस खतरनाक एवं जोखिम भरे दृष्टिकोण की नीवं पर बनाया जाता है। पाठक डर एवं आंशका का अनुभव करते हैं, जब वे किरदार को विपत्ति में पाते हैं। जरूरी नहीं है कि यह जिन्दगी और मौत वाली स्थिति हो। यह इस बात पर निर्भर करता है कि किस प्रकार के विधा का लेखन हो रहा है – जो खतरा है, वह किरदार के शारीरिक,  मानसिक, भावनात्मक, अध्यात्मिक एवं रिश्ते सम्बन्धी हो सकते हैं। किसी भी विधा में आप लिख रहे हों, आपको कुछ ऐसा घटता हुआ दिखाना है, जो बहुत ही भयानक एवं दिल दहला देने वाला और उसके बाद आप सस्पेंस बरक़रार रखने के लिए उस खतरे को टाल दीजिये।

कहानी में तनाव को तब तक बढाते रहना चाहिए जब तक कि वह संतुष्टिदायक क्लाइमेक्स तक न पहुँच जाए। खतरे को इतना नजदीकी, अंतरंग, व्यक्तिगत और विनाशकारी होना चाहिए कि अगर किसी सीन में मुर्गा छाप पटाखा फूटने जितना सस्पेंस हो तो तीसरे सीन में पहले सीन के कारण ऐसा बम फूटे कि ५ मिनट तक कानों में कोई आवाज़ न सुनाई दे। अगर आप कहानी में तनाव को बढ़ा नहीं पाते हैं तो सारा बना-बनाया सस्पेंस भाप की तरह उड़ जाएगा।

जब आप गुब्बारे को फुला रहे होते हैं तो भरसक प्रयास करते हैं कि कहीं से भी हवा न निकले, बिलकुल उसी तरह आप यह नहीं चाहेंगे की आपकी कहानी की हवा निकल जाए, इसलिए तनाव को बढाते रहने चाहिए जब तक कि वह ऐसे स्टेज पर न पहुँच जहाँ वह किसी भी सेकंड अपने आप फूट सकता है।

#amwriting

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संस्पेंस लेखन #२
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