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अपूर्वा अनित्या

अपूर्वा उन विरल कवयित्रियों में हैं जो कविता को ऐन कविता की तरह लिखती हैं, न रिपोर्ट बनाती हैं, न कविता को नारा बनने देती हैं ।वे लफ्जों की सौदागर हैं और कविता उनके हाथों में गढी नहीं जाती, बहती है। उनकी कविताओं का टेक्सचर कहें या बनावट और बुनावट, अनूठे हैं ।
अपूर्वा अमूर्त के मोह से दूर रहती हैं, बिंब भी उन्हें बहुत लुब्ध या मुग्ध नहीं करते । यहां एक हरारत है , ह्रदय का स्पंदन है और है बिन कहे कहने का कौशल ।

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