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5 Comments

  1. Gurpreet Singh
    July 10, 2020 @ 6:59 pm

    ये बिज़नैस है बबुआ..OTT पर कुछ नया परोसने की होड़ है और कुछ नया बहुचर्चित तब बनता है जब वो कंट्रोल़वर्शियल हो
    तो ऐस में समाज के प्रति दायित्व बैक बर्नर पर चला जाता है

    • सिद्धार्थ अरोड़ा सहर
      July 10, 2020 @ 7:12 pm

      अंत साबित करता है कि हम क्या दर्शाना चाहते थे, अफ़सोस की अब क्रिमिनल्स को ग्लोरीफाई करते ही मिलते हैं।

  2. Hitesh Rohilla
    July 10, 2020 @ 7:03 pm

    Nice assessment..
    I liked it and would like to see more from the writer. Thanks to the Sahitya Vimarsh too to bring it to readers.

    • सिद्धार्थ अरोड़ा सहर
      July 10, 2020 @ 7:11 pm

      Thanks to you brother for your undying support and valuable comment ❣️

  3. हरीश गुप्ता
    July 11, 2020 @ 3:30 pm

    फिल्मों का समाज पर असर जैसे मुद्दों पर चर्चा पहले भी होती रही है। OTT प्लेटफॉर्म्स तक लोगों की पहुंच बढ़ने से अब ऐसे सवाल उठते ही रहेंगे। इसपर अंकुश लगना टेढ़ी खीर है। पर फिर भी निर्माता निर्देशक इत्यादि की सोशल ज़िम्मेदारी तो बनती ही है कि क्राइम को ग्लोरीफाई न करें, आजकल का दौर तो इसे ग्लोरीफाई ही कर रहा।

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